शायरी
इस कदर टूटेगी मेरी उम्मीद, मुझे तुझसे ऐसी आस न थी
रहम करती जो मेरी जिंदगी पर वो रहगुज़र मेरे पास न थी
दर्द की किताब में शब्द कुछ धुंधले धुंधले से हैं
तेरा गम मेरे गम से कुछ मिलते जुलते से हैं
गर दोस्त न मिलता हो ज़माने में
बस एक बार चले आइए मैखाने में
राह आसान हो तो चलने का मज़ा क्या है
दर्द न हो तो फिर जीने का मज़ा क्या हैं
इस कदर टूटेगी मेरी उम्मीद, मुझे तुझसे ऐसी आस न थी
रहम करती जो मेरी जिंदगी पर वो रहगुज़र मेरे पास न थी
दर्द की किताब में शब्द कुछ धुंधले धुंधले से हैं
तेरा गम मेरे गम से कुछ मिलते जुलते से हैं
गर दोस्त न मिलता हो ज़माने में
बस एक बार चले आइए मैखाने में
राह आसान हो तो चलने का मज़ा क्या है
दर्द न हो तो फिर जीने का मज़ा क्या हैं