Thursday, April 11, 2019

Shayari

शायरी 
इस कदर टूटेगी मेरी उम्मीद, मुझे तुझसे ऐसी आस न थी
रहम करती जो मेरी जिंदगी पर वो रहगुज़र मेरे पास न थी  

दर्द की किताब में शब्द कुछ धुंधले धुंधले से हैं 
तेरा गम मेरे गम से कुछ मिलते जुलते से हैं 

गर दोस्त न मिलता हो ज़माने में 
बस एक बार चले आइए मैखाने में 

राह आसान हो तो चलने का मज़ा क्या है 
दर्द न हो तो फिर जीने का मज़ा क्या हैं